आज साहित्य क्षेत्र भी धर्म क्षेत्र ही है. साहित्य जगत रणक्षेत्र में तब्दील हो चुका है .विमर्शों की भरमार
है.प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने पाठ केन्द्रित आलोचना पर बल देते हुए कि आलोचना को रचना से मुखातिब होना चाहिए. जिज्ञासा के बैनर तले उक्त प्रोग्राम में मनोज रूपड़ाऔर प्रभात रंजन की कहानियों पर विस्तार
से चर्चा हुई.मनोज रूपड़ा फैंटेसी शिल्प में लिखने वाले वर्त्तमान के सबसे बड़े कहानीकार हैं.